|| कृष्ण भजन ||

ज़री की पगड़ी बाँधे, सुंदर आँखों वाला
Zari Ki Pagdi Bandhe Sunder Aankhon Wala



ज़री की पगड़ी बाँधे, सुंदर आँखों वाला,

कितना सुंदर लागे बिहारी कितना लागे प्यारा ।

ज़री की पगड़ी बाँधे...

कानों में कुण्डल साजे, सिर मोर मुकुट विराजे,

सखियाँ पगली होती, जब - जब होठों पे बंसी बाजे ।

हैं चंदा ये सांवरा, तारे हैं ग्वाल बाला,

कितना सुंदर लागे बिहारी कितना लागे प्यारा ॥

ज़री की पगड़ी बाँधे, सुंदर आँखों वाला,

कितना सुंदर लागे बिहारी कितना लागे प्यारा ।

ज़री की पगड़ी बाँधे...

लट घुंघराले बाल, तेरे कारे कारे बाल,

सुन्दर श्याम सलोना तेरी टेडी मेडी चाल ।

हवा में सर - सर करता तेरा पीताम्बर मतवाला,

कितना सुंदर लागे बिहारी कितना लागे प्यारा ॥

ज़री की पगड़ी बाँधे, सुंदर आँखों वाला,

कितना सुंदर लागे बिहारी कितना लागे प्यारा ।

ज़री की पगड़ी बाँधे...

मुख पे माखन मलता, तू बल घुटने के चलता,

देख यशोदा भाग को देवों का भी मन जलता ।

माथे पे तिलक है सोहे आँखों में काज़ल डाला,

कितना सुंदर लागे बिहारी कितना लागे प्यारा ॥

ज़री की पगड़ी बाँधे, सुंदर आँखों वाला,

कितना सुंदर लागे बिहारी कितना लागे प्यारा ।

ज़री की पगड़ी बाँधे...

तू जब बंसी बजाए तब मोर भी नाच दिखाए,

यमुना में लहरें उठती और कोयल भी कू - कू गाए ।

हाथ में कँगन पहने और गल वैजयंती माला,

कितना सुंदर लागे बिहारी कितना लागे प्यारा ॥

ज़री की पगड़ी बाँधे, सुंदर आँखों वाला,

कितना सुंदर लागे बिहारी कितना लागे प्यारा ।

ज़री की पगड़ी बाँधे


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